1.पाचन संस्थान [DIGESTIVE SYSTEM]
मनुष्य के जीवित रहने के लिए तीन आवश्यक आवश्यकताएं - भोजन, वस्त्र और मकान। भोजन एक ऐसी आवश्यकता है जो मानव शरीर- रूपी मशीन के लिए आवश्यक है। बिना भोजन के यह मशीन बेकार हो जाती है, क्योंकि मनुष्य के शरीर में हर पल क्षण कई ऐसी क्रियाएं होती है जो शरीर की सूक्ष्मतम जीवित इकाई कोशिका को प्रभावित करती हैं। मनुष्य के शरीर में कोशिकाएं टूटती है, शरीर वृद्धि के साथ नयी कोशिकाएं बनती है। इस सबके लिये शरीर को शक्ति तथा ऊर्जा चाहिये होती है। इसी प्रकार शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए शरीर को रोगरोधन क्षमता की आवश्यकता होती है। ये तीनों काम, भोजन करता है
(1) नयी कोशिकाएं बनाना टूटी-फूटी कोशिकाओं की मरम्मत
(2) शरीर को ऊर्जा + शक्ति देना।
(3) शरीर को रोगरोधन शक्ति प्रदान करना।
किन्तु केवल भोजन खाने मात्र से ही यह का नही हो जाते। हमारी यह जीवित मशीन चलती रहे, स्वस्थ रहे इसके लिये भोजन का पाचन, अभिशोषण तथा चयापचय आवश्यक
पाचन क्रिया -
भोजन को घुलित अवस्था में बदलकर इस योग्य बनाना कि अभिशोषण हो सके।
अभिशोषण -
पाचन क्रिया के बाद भोजन के पोष्टिक तत्वों के अपने सरलतम रूप में तरल रूप ( भोजन रस ) में परिवर्तित होने के बाद रक्त में मिलना।
चयापचय -
भोजन रस में मिले पौष्टिक तत्वों द्वारा अपने तीनों कार्यो कओ विभिन्न रासायनिक क्रियाओं द्वारा अन्तिम रूप देना ही आसान शब्दों में चयापचय है।
वे सब अंग जो इन तीनों क्रियाओं में भाग लेते है वे पाचन संस्थान कहलाते है। इस क्रिया में भाग लेने वाले अंगो को आहार नाल ( Food Pipe or Alimentary canal ) कहते है जो कही पतली कही चौड़ी होती है, क्योंकि पाचन संस्थान के अंगो के आकार के अनुसार आहार नाल पतली-चौडी होती है।
पाचन में सहायक अंगो को हम दो भागों में बाट सकते है।
(1) पाचन संस्थान के प्रमुख अंग -
ये वे अंग है जो भोजन के पाचन, अभिशोषण, चयापचय क्रियाओं में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेते है। इसके अन्तर्गत -
(1) मुंह (Mouth)
(2) ग्रास नली या भोजन नली (Oesophagus)
(3) आमाशय (Stomach)
(4) छोटी आत (Small Intestine)
(5) बड़ आत (Large Intestine)
(2) पाचन क्रिया में सहायक अंग -
ये वे अंग है जो प्रत्यक्ष रूप से पाचन क्रिया में भाग नही लेते, पर इनके बिना भोजन पाचन नही हो सकता। ये समस्त अंग ग्रन्थियां (Glands) है-
(1) लार ग्रन्थियां
(2) यकृत
(3) क्लोम ग्रंथि
(4) प्लीहा
(5) पिताशय